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यादों की भूलभुलैया

Varun Chaudhary antrikshVarun Chaudhary antriksh November 16, 2022
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मेरी कुछ यादें भी इक भूलभुलैया जैसी हैं ।
भूल गया हूं, और बाहर आ नहीं सकता ।

जैसे कोई धुन बजती रहती हो मिरे अन्दर।
उसे गाना चाहता हूं, मगर गा नहीं सकता।

पुरानी किताबें पढ़ते ही यादों में खो जाता हूं। 
लेकिन रो नहीं सकता, हंस भी नहीं सकता। 



© वरुण चौधरी अंतरिक्ष 

@revolution_budd on twitter



#nostalgia #labyrinthwalk 

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