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वाइट वॉरिअर ( श्वेत योद्धा )

Varun Chaudhary antrikshVarun Chaudhary antriksh October 20, 2022
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प्रताप सिंह और अरोड़ा जी लगभग 70 वर्ष की उम्र के बुजुर्ग हैं। अरोड़ा जी सुबह-सुबह प्रताप सिंह के घर मिलने आए थे। दोनों बहुत पुराने दोस्त हैं और आज कई सालों के बाद मिल रहे थे। दोनों ही रिटायर हो चुके हैं। जैसा कि सभी बुजुर्ग रिटायरमेंट के बाद अक्सर करते हैं; दोनों अपने पुराने किस्से याद करने के साथ-साथ अपने बच्चों के बारे में बात कर रहे थे। 

दोनों घर के बाहर लॉन में बैठे हुए थे। अभी-अभी सुबह निकली थी और सूरज की कुछ किरणें छिटकती हुई दिख रही थीं। प्रताप जी की बहू ने नौकर के हाथों लॉन में चाय भिजवा दी। 

प्रताप सिंह ने चाय पीते हुए अखबार में एक खबर पढ़ी और बोले: आजकल सरहद पर बहुत तनाव है। 

अरोड़ा जी बोले: हां लगता है चाइना और इण्डिया के बीच कोल्ड वॉर चल रहा है। 

प्रताप बोले: मेरा बड़ा बेटा भेदजीत इण्डियन आर्मी में ऑफिसर है। आजकल वह एल.ए.सी के पास ही तैनात है। मुझे बड़ा गर्व होता है कि मेरा बेटा भेदजीत अपनी जान जोखिम में डालकर देशवासियों की रक्षा करता है। 

छोटा बेटा दीपक एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी का डॉक्टर) है। वह सभी डॉक्टरों की तरह अपनी कूल लाइफ जी रहा है। वह अपने ही शहर के "वी केयर" हॉस्पिटल में आईसीयू संभालता है।

अरोड़ा जी बोले: वैरी गुड। अरोड़ा जी कुछ देर की चुप्पी के बाद फिर बोले। मेरा बेटा कार्तिक आईटी कम्पनी में इंजीनियर है। उसका सालाना 42 लाख का पैकेज है। उसने अभी-अभी नई कार ली है। कार्तिक बहुत मजे की जिन्दगी जी रहा है। और मेरी छोटी बेटी नेहा अमेरिका की एक लैब में साइंटिस्ट है। उसका भी बहुत अच्छा पैकेज है। वह बहुत खुश है। नेहा कहती है कि पीएचडी करने के बाद एक फायदा है कि अनपढ़ या नासमझ इन्सानों के साथ दिमाग नहीं खपाना पड़ता है। 

प्रताप जी बोले: अच्छा नेहा बेटी अमेरिका पहुंच गई। बहुत अच्छा लगा सुनकर। 

अरोड़ा जी बोले: यार प्रताप एक बात बोलूं। तुम्हें अपने बड़े बेटे को भी फौज भेजने के वजाय डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहिए था। मुझे नौकरी के लिए जान जोखिम में डालना बिल्कुल पसन्द नहीं है। मुझे तुम्हारे डॉक्टर बेटे दीपक की कूल लाइफ पसन्द है।

प्रताप बोले: हां लेकिन आजकल वह कोरोना वायरस की बीमारी की वजह से सेमिनार में बिजी रहता है। 

अरोड़ा जी का तभी फोन आ जाता है। वह बोलते हैं कि इस बार हम मिलने के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करेंगे। हम जल्दी मिलेंगे।

कुछ दिन बाद प्रताप जी टेलीविजन पर न्यूज़ देख रहे थे। चाइना से झड़प की खबर देखकर वह अपने बड़े बेटे भेदजीत के लिए बहुत परेशान हो गये। उन्होंने रिमोट दबाया तो अगले चैनल पर हिंदुस्तान में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते हुए केसों की खबर आ रही थी। न्यूज़ में यह भी देखा कि बुजुर्ग लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा है। 

प्रताप जी कुछ परेशान होकर अपनी पत्नी विनीता जी से बोले: एक तो हम पहले से ही अपने बड़े बेटे भेदजीत की बॉर्डर पर पोस्टिंग की वजह से चिंतित रहते हैं। अब यह महामारी का नया खतरा भी पैदा हो गया। 

हे ईश्वर सभी की रक्षा करो विनीता जी बोलती हैं। ऐसे समय में हमें अपने छोटे बेटे दीपक के बारे में सोच कर खुशी मिलती है। दीपक खुद भी सुरक्षित है और वह सभी मरीजों की जान भी बचाएगा।

अगले दिन प्रताप जी और विनीता जी अखबार में कोरोना से कुछ डॉक्टरों की मौत की खबर पढ़ते हैं। विनीता जी को प्रताप जी के चेहरे पर परेशानी के भाव साफ नजर आ रहे थे। तभी विनीता जी को अस्पताल जाता हुआ अपना बेटा डॉक्टर दीपक दिखाई दिया। विनीता जी दीपक से बोलीं बेटा अपना ख्याल रखना।

किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कुछ दिनों बाद डॉक्टर दीपक बीमार हो गये। उसे दो दिन से बुखार था। दीपक को फिक्र थी कि कहीं उसकी वजह से उसकी चार साल की छोटी बेटी और बुजुर्ग माता-पिता संक्रमित ना हो जाएं इसलिए वह अपने अस्पताल में एडमिट हो गया। 

जब फोन पर प्रताप जी को दीपक की रिपोर्ट पता चली तो वह भौचक्का रह गए। दीपक कोरोना पॉजिटिव था। प्रताप जी को अचानक से अहसास हुआ कि उनका छोटा बेटा भी देश की हिफाजत के लिए एक जंग लड़ रहा था। लेकिन उन्होंने कभी इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। प्रताप जी विनीता जी को बताने लगे उनका छोटा बेटा वाइट वॉरियर है। 

प्रताप जी हालचाल जानने के लिए अपने बड़े बेटे को फोन करते हैं। आज कई दिनों बाद उसका फोन मिला था। प्रताप जी बहुत भावुक होकर पूछते हैं भेदजीत तुम सही तो हो ना! 

मेजर भेदजीत जवाब देते हैं: पापा मैं एकदम सही हूं। हमारी बटालियन चाइना बॉर्डर से बहुत दूर है। हम पूरी तरह सुरक्षित जगह पर हैं। कमाण्डर साहब ने बताया है यदि हालत बहुत ज्यादा खराब नहीं हुए तो हमारी बटालियन को बॉर्डर पर भेजने का कोई प्लान नहीं है। फोन के दूसरे सिरे पर आवाज सुन रहे प्रताप जी ने राहत की सांस ली।

डॉक्टर दीपक को डायबिटीज भी थी। दो दिन बीतने के बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। दीपक को उन्हीं के आईसीयू में ऑक्सीजन लगाकर अन्डर ऑब्जर्वेशन रखा गया था।

प्रताप जी अपने डॉक्टर बेटे दीपक के लिए बेहद चिंतित हो गये। वह दीपक से मिलने अस्पताल के बाहर तक आये तो गेट पर उनकी मुलाकात अरोड़ा जी के बेटे से हो गयी। पता चला कि अरोड़ा जी कोरोना संक्रमित पाए जाने की वजह से आज सुबह इसी अस्पताल में एडमिट हुए हैं। अरोड़ा जी की हालत बहुत गम्भीर है। प्रताप जी अपने छोटे बेटे और पुराने दोस्त दोनों को एक साथ बीमार हालत में पाकर बेहद भावुक हो जाते हैं। दोनों पुराने दोस्तों के परिवारों का खराब दौर अभी खत्म नहीं हुआ था। कहानी लगातार अपने क्लाइमैक्स की ओर बढ़ रही थी।

अरोड़ा जी प्राईवेट वार्ड में एडमिट थे। रात को वह नर्स से सांस फूलने की शिकायत करते हैं। उसके बाद अरोड़ा जी बेहोश हो गये। ऐसे वक्त में उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत थी। नर्स और वार्डबॉय उन्हें तुरन्त ही स्ट्रेचर पर लिटा कर आईसीयू ले गये। 

आईसीयू के डॉक्टर अरोड़ा जी को होश में लाने के लिए आवाज देते हैं। अरोड़ा जी ... अरोड़ा जी। दरअसल उसी आईसीयू में एडमिट डॉक्टर दीपक को सुबह पता लग गया था कि अरोड़ा अंकल इसी अस्पताल में भर्ती हुए हैं। 

जैसे ही आधी नींद में सोए हुए डॉक्टर दीपक के कानों में अरोड़ा जी शब्द पहुंचा। दीपक चौकन्ना हो गया। 

अरोड़ा जी का ऑक्सीजन लेवल(SPO2) बहुत कम हो गया था। उन्हें तुरन्त वेंटिलेटर की जरूरत थी। दरअसल मरीज को वेंटीलेटर से कनेक्ट करने के लिए उसकी सांस की नली में एंडोट्रेकियल ट्यूब (ई.टी.) डालनी होती है। नाइट शिफ्ट में वहां मौजूद डॉक्टर नये थे। दुर्भाग्यवश उनका ई.टी. डालने का प्रयास बार-बार असफल हो रहा था।

इस समय वहां ई.टी. ट्यूब डालने के लिए एनेस्थीसिया के विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत थी। इस विशेषज्ञता के एक डॉक्टर वहां मौजूद थे जो खुद गम्भीर रूप से बीमार होने की वजह से वहां मरीजों के बैड पर लेटे हुए थे। 

आधी नींद से जाग चुके डॉक्टर दीपक ने मौके की नजाकत को भांप लिया। दीपक को मालूम था यदि कुछ मिनटों में वेंटीलेटर से ऑक्सीजन नहीं मिली तो अरोड़ा अंकल की जान चली जाएगी। 

डॉक्टर दीपक अपनी जान की परवाह किए बिना बैड से उठ खड़े हुए। उन्होंने अपनी ऑक्सीजन मास्क हटा दिया। फिर अरोड़ा अंकल के बेड पर पहुंचकर कुछ ही मिनट में उनकी सांस की नली में ई.टी ट्यूब डाल दी। डॉक्टर दीपक तुरन्त अपने बैड पर वापस आ गये। इस रोमांचक कहानी का अंत शायद कुछ अलग ही था।

हांफते हुए डॉक्टर दीपक अपने बैड पर ऑक्सीजन लगाने के बाद स्थिर हो गये। इलाज जारी रहा और दो दिन बाद उनकी हालत में सुधार आने लगा।

वेंटिलेटर के सहारे जीवित बचे अरोड़ा जी भी तीसरे दिन होश में आ गये। कुछ दिन बाद उनकी हालत में आश्चर्यजनक रूप से सुधार आने लगा। जब वहां मौजूद मरीज और नर्सों ने उस रात की पूरी कहानी अरोड़ा जी को बतायी तो अरोड़ा जी को अपनी दोस्ती और दोस्त के बेटे पर बहुत गर्व महसूस हुआ। 

कुछ दिन बाद डॉक्टर दीपक और अरोड़ा जी दोनों की ही कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ गयी। फिर दोनों की अस्पताल से छुट्टी हो जाती है। 

प्रताप जी अपने बेटे दीपक से मिलने अस्पताल आए हुए थे। अस्पताल के गेट पर अरोड़ा जी प्रताप जी से बोलते हैं: यार प्रताप मुझे पिछले कुछ दिनों में अहसास हुआ कि लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को भी अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। मैं जिन्दगी भर उन सभी लोगों का आभारी रहूंगा जो दूसरों की रक्षा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। प्रताप तुम्हारे दोनों बेटे वॉरियर हैं।

प्रताप जी अपने मन में गर्व से सोच रहे थे। मेरा दीपक एक वॉरियर है। वह वाइट वॉरियर है  ।

© वरुण चौधरी अंतरिक्ष 

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