नारी's image
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नारी
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नीरसता में रस भर दे 
ऐसा अद्भुत राग है नारी। 
संघर्षों की कड़ी धूप में 
ठण्डी ठण्डी छांव है नारी। 

मर्यादा की हद में कैद 
एक शक्ति है नारी। 
जीवन के माधुर्य की 
अभिव्यक्ति है नारी। 

दीवारों के सत्कार में 
बन जाती है घर की पुजारी। 
नहीं तो बखूबी जानती है 
महफिल लूटने की अदाकारी। 

बगिया में महकती फुलवारी 
पन्नों पर उकेरी गुलकारी।
नारी ईश्वर की सुरूप चित्रकारी 
जैसे कुदरत ने हो छवि संवारी।

इन्साफ की देवी है नारी 
कलम से लिखती तकदीर हमारी। 
अमृत कलश उसके समीप 
फिर भी विष पीती मीरा मतवारी। 

बिखरती है नई शुरुआत करती है 
हंसी में छिपाती है आंखों का वारि। 
दिये की बाती की तरह जलती है 
तब छटती है अंधियारी। 

उगते सपनों को पंख देने की 
दृढ़ प्रतिज्ञा है नारी। 
किसी के नाम में गुमनाम होने की 
गूढ़ तपस्या है नारी। 

तुम मृदुभाषी तुम सुकुमारी 
बस एक सहारे पर बलिहारी। 
पद्मावत का जौहर भी है 
प्रेम में डूबी राधा प्यारी। 

तुम गर्भधारिणी तुम सदाचारिणी 
तुम शतावरी तुम महागौरी। 
हर किरदार निभाने वाली 
तुम रणचण्डी तुम चिंगारी। 

नारी की करुणा नेकी को
पुरुष न समझे लाचारी। 
अर्धांगिनी से ही पूर्ण पुरुष 
ईश्वर का उपहार है नारी।

© वरुण चौधरी अंतरिक्ष

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