उजला रास्ता, उदास लोग's image
OtherPoetry2 min read

उजला रास्ता, उदास लोग

Varsha SaxenaVarsha Saxena November 19, 2021
Share0 Bookmarks 8 Reads1 Likes
इस उजले रास्ते की दीवारों के बीच
एक खाली, खामोश और गुमनाम-सी मैं,
वैसी ही हूँ जैसे कोई चातक पक्षी
होता है एक लम्बे समय का प्यासा
स्वाति नक्षत्र से मिलने वाली कुछ बूंदों का।

इस उजले रास्ते में हैं अनगिनत चेहरे
जिनकी पहचान मेरे लक्ष्य की तरह
अब तक अछूती है मुझसे।
मैं इनको देख सकती हूँ और 
छूकर महसूस कर सकती हूँ
इनके उदास चेहरे
और इन चेहरों पर बिखरा पीलापन।

इनकी आवाज़ में छुपी हुई पीड़ा
बिखरती जा रही है मेरे चेहरे पर
और मैं अपने लक्ष्य के पीछे
भागती, गिरती, उठती
बस चलती जा रही हूँ।
लक्ष्य कितनी दूर है? नहीं पता।
रास्ता सही है? नहीं पता।
मंज़िल मिलेगी? ये भी नहीं पता।

ये सब ठीक वैसा ही है जैसे
मेरे सामने बिखरा हो अथाह सागर
और मुझे ढूँढनी हो उसमें से
अपने हिस्से की सिर्फ एक बूँद।

तुम भी ठीक वैसे ही हो
और सच कहूँ तो
मुझे अब डर लगने लगा है
तुम्हारे साथ होने से।
डर लगता है कि मेरी भावनाएँ
कहीं खो ना जाएँ
तुम्हारे इस सूरज से चमकते चेहरे में
जैसे मेरा अस्तित्व खोता जा रहा है
इस उजले रास्ते और उदास लोगों के बीच।

-वर्षा सक्सेना

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts