चाय अदरक की's image
Share0 Bookmarks 41 Reads1 Likes
ये आवाज मेरी कोई सुन रहा
वो नही मैं जो बोल रहा 
वो सब जो मैं नहीं बोल पा रहा

क्या कहा 
कुछ कहा नहीं 
अब कहें क्या कैसे किसको
कोई सुने तो जो हम कहे नहीं

ये रात हुई 
ठंड और यादों ने घेर लिया
या ठंडी पड़ी यादों ने घेर लिया
कभी अलाव जलाए 
इन यादों के सहारे 
तूफान बर्फिले कई गुज़ारे

आज़ादी नहीं कही 
उन चिड़ियों की तरह 
आसमान को छु 
वापस लौट आओ

की चढ़ी है चाय अदरक वाली

की समझ न पाए वक्त को अभी भी
समझ पाते तो तेज़ कर देते 
अब सब जब तुम नही
समझ पाते तो रोक देते
तब सब जब 
थे तुम ख्वाबों और बाहों में 

जोड़ लिया तिनका तिनका कर
फिर से
पुरा नहीं थोड़ा ही सही 
बिखरा है सब अभी भी
लौट आओ

चढ़ी है चाय अदरक की ।।


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts