bapu ka bharat 1's image
Share0 Bookmarks 223 Reads0 Likes

क्या ख़ैरियत बताऊँ मैं

मेरे वतन जहान की

बापू की सीख में बसे

भारत मेरे महान की


इंसानियत को भूलकर

हैवानियत कुबूल कर

लहरा रहे हथियार 

भारत के नौजवान की


जब सिसकियाँ सुनाई दे

लाचारगी दिखाई दे

फिर होड़ क्यों मची हुई

घंटो की और अज़ान की


नर्क और स्वर्ग हैं यहीं

ढूढ़ों न जन्नते कहीं

बस न वज़ह बनो कभी

गिरते किसी मकान की


इक चाल है छिपी हुई

कुछ लोग हैं सियासती

पेट हैं जिनके भरे

पर नींद न थकान की


वो सीख नहीं जानते 

गीता की या कुरान की

बस आग लगाते हैं वो

हिन्दू और मुसलमान की


इंसानियत के क़तल की

फ़िक्र उनको है कहाँ

है फ़िक्र बस की बिक्रियां

बढ़ती रहे दुकान की


वैशाली 'गंगोत्री'


 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts