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कुछ यह शब्द नहीं कुछ मे ही बहुत कुछ हैं।बस देखने का नजरिया चाहिए जिस किसी इंसान ने यह देख लिया वह सब कुछ कर लिया क्योंकि हर इंसान शुरुआत कुछ करने से ही शुरू करता हैं।लेकिन उसका अंत कहाँ हैं।यह आज तक कोई नहीं जान सका क्योंकि वह धीरे धीरे बहुत कुछ करने लगता हैं।उसे पता भी नहीं चलता की वह धीरे धीरे बहुत बडी बडी ऊँचाईयो को कब छूने लगता हैं।कही ना कही वह अनंत होने लगता हैं।ना तो उसका कोई सीमा होता हैं।ना कोई अंत हर नये शुरुआत का नाम हैं।कुछ इसलिए जीवन मे अगर कोई समस्या या कठिनाई आये तब आप कुछ करने का सोच भी लेते हैं।तब आप बहुत कुछ कर लेते आज जो भी सफल और कामयाब हैं।वह भी शुरूआत मे कुछ करने का फैसला किये होंगे इसलिए वह आज बहुत कुछ हैं।कुछ मे ही बहुत कुछ हैं।यह बात साफ हो गया हैं।#

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