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कितने दामन थामे कितने साथ छोड़ गए।
तब भी तो तन्हा थे अब भी तन्हा रह गए।।

न बारिश आंखों की रुकी न प्यास लबों की मिटती है।
तमाशा ही है जिंदगी का पिस कर ही मेहंदी रचती है।।-वैभव रश्मि वर्मा

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