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संभावना


लंबी प्रतीक्षा के बाद..

निकला हो सूरज,

गुनगुनी सी धूप में,

मैं बैठी होऊं छत पर..

चुपचाप पलके मूंदे,

कोई पीछे से आकर..

बंद कर दे अपनी हथेलियों से,

मेरी आंखें..

कोई बच्चा, कोई अपना,

या फिर कोई सपना..

ऐसे समय में संभव है क्या?

ऐसा जीवन!


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