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Romantic PoetryPoetry1 min read

डॉक्टरी अब व्यापार बन कर रह गई

Uday Kant PandeyUday Kant Pandey April 28, 2022
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डॉक्टरी अब व्यापार बन कर रह गई,

जिसे समझते थे रूप भगवान का,

पता नही अब उसे कौन सी लत लग गई?

डिग्रियां बहुतेरे इक्कठे कर रख लिए,

अब उन कागज़ों की बोलियां बाजारों में लग गई।

पैसों से अब इलाज का भाव तय हुआ,

हर एक डॉक्टर अपने पेशे का माहिर है,

डॉक्टरी इलाज के लिए अब सीखता कौन?

घर में जो कोई एक डॉक्टर बना गया,

घरवाले सोचते हैं,नोटों की नई मशीन लग गई

डॉक्टरी अब व्यापार बन कर रह गई,

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