माँ's image
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जब कोई रोटी उससे जल जाती है,
वो माँ ही है जो उसे करारी बताकर खाती है ।

जब हमें कोई पीड़ा हो जाती है,
वो माँ ही है जो पूरी रात नहीं सो पाती है ।

हमारी हर पीड़ा से खुद भी पीड़ित हो जाती है,
वो माँ ही है जो ऐसा महसूस कर पाती है ।

अपने बच्चों के खातिर खुद को भूल जाती है,
वो माँ ही है जो हमें कभी नहीं भूल पाती है ।

अनेक कष्ट सहकर जो हमें जन्म दे जाती है,
वो माँ ही है जो ऐसा कष्ट सहन कर पाती है ।

: तुषार "बिहारी" 

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