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गोवर्धन : प्रकृति का महत्व

तुषार "बिहारी"तुषार "बिहारी" October 26, 2022
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आज गोवर्धन पूजा के उपलक्ष्य में मैं आप सभी से अपने कुछ विचार साझा कर रहा हूं

जैसा हम सभी को ज्ञात है कि भगवान श्री कृष्ण ने 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव द्वारा किए गए अहंकार रूपी अनेक प्रहार और भयावह वर्षा से गांव वालों की रक्षा की थी भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने के पीछे उनका उद्देश्य क्या हो सकता है और वो हमें क्या सीख देना चाहते थे? मैं अपने सूक्ष्म से भी सूक्ष्म ज्ञान से आप सभी से अपने विचार साझा करने का प्रयास कर रहा हूं;

गोवर्धन पर्वत उठाने के कई उद्देश्य हो सकते है लेकिन उनमें से सबसे मुख्य उद्देश्य जो मुझे लगता है वो यह कि जिसका दर्जा ईश्वर से भी ऊपर है वो है प्रकृति, जैसे भगवान श्री कृष्ण ने उसे अपनी छोटी उंगली से उठाकर अपने से ऊपर स्थान दिया और स्वयं भी उस प्रकृति (पर्वत) के अधीन खड़े रहे सब जानते है कि भगवान श्री कृष्ण का सम्पूर्ण जीवन उनकी लीलाओं से विख्यात है जो उन्होंने शिशु रूप से ही दिखाना शुरू कर दी थी, अगर वो चाहते तो इस बार भी अन्य लीलाओं की तरह कोई लीला करके आसानी से गांव वालो की रक्षा कर सकते थे और उन्हें इतने दिन गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली से उठाना ना पड़ता लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि वो सबको दिखाना चाहते थे कि ईश्वर भी प्रकृति के अधीन है उनसे ऊपर नहीं है उन्होंने यह भी बताया कि प्रकृति हमारी सहायता के लिए सदैव उपस्थित रहती है और कितनी महत्वपूर्ण है ।

अगर प्रकृति हमारा पालन पोषण कर सकती है तो समय आने पर हमारी रक्षा भी कर सकती है इसलिए ईश्वर ने प्रकृति को अपने से ऊपर स्थान दिया और उसे पूजनीय बनाया

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