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चलो फिर से चला जाए

तुषार "बिहारी"तुषार "बिहारी" August 13, 2022
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चलो फिर से चला जाए,
जिंदगी को समझा जाए ।
पहले जब समझे थे तो कम ही समझे थे,
सोचा एक बार फिर से समझा जाए ।

चलो फिर से चला जाए, 
जिंदगी को समझा जाए ।

कदम कदम पर बाधाएं है,
बिखरी पड़ी झूठी आशाएं है ।
बताओ फिर कैसे जिया जाए?
किस तरह इसे समझा जाए ।

चलो फिर से चला जाए,
जिंदगी को समझा जाए ।

उम्मीदें जो हम खुद से किया करते थे,
जिन उम्मीदों पे जिया करते थे ।
उन उम्मीदों को फिर से किया जाए,
अपने खातिर फिर से जिया जाए ।

चलो फिर से चला जाए,
जिंदगी को समझा जाए ।

वक्त जो हमारा हुआ करता था,
हौसलों का काफ़िला साथ हुआ करता था ।
उस वक्त को वापस लाया जाए,
हौसलों को फिर से बढ़ाया जाए ।

चलो फिर से चला जाए,
जिंदगी को समझा जाए ।

साथ जो हुआ करते थे,
उलझनों को सुलझाया करते थे ।
उन्हें वापस बुलाया जाए,
उलझनों को फिर से सुलझाया जाए ।

चलो फिर से चला जाए,
जिंदगी को समझा जाए ।

कठिन रास्तों पर चला करते थे,
हर बाधाओं को पार किया करते थे ।
उन रास्तों पे वापस चला जाए,
बाधाओं को पार फिर से किया जाए ।

चलो फिर से चला जाए,
जिंदगी को समझा जाए ।

: तुषार "बिहारी" 

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