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बंधुत्व: प्रकृति का अधिकार

तुषार "बिहारी"तुषार "बिहारी" April 22, 2022
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ये बंधुत्व ना है इंसानों का,
ये बंधुत्व ना है भगवानों का ।

बंधुत्व है प्रकृति और इंसानों का,
बंधुत्व है हर एक आशियानों का ।

जुड़ी है जिससे जीवन की हर एक सांस,
उसी प्रकृति से है जीवन की हर एक आस ।

निरंतर करें हम प्रकृति के मान का प्रयास,
उसी से बढ़ेगा हम पर प्रकृति का विश्वास । 

प्रकृति करती है निरंतर हम पर उपकार,
जो देती रहती है हमें अनमोल उपहार ।

बढ़ेगा बंधुत्व से प्रकृति का प्रकार,
ना करेगी वो हम पर भयावह प्रहार ।

बात करते है देश विदेश के गलियारों की,
गली, कुंचों, चौबारों की ।

बात है देश के हर एक परिवारों की,
बंधुत्व निभाने वाले हर एक जिम्मेदारों की ।

उनसे बंधुत्व निभाना है हम इंसानों का कर्म,
हम सबका होना चाहिए वो पहला धर्म ।

यही बंधुत्व मिटाता है आपस में दूरियां,
यही बंधुत्व लाता है रिश्तों में नजदीकियां ।

जिस देश में हो बंधुत्व की भावना का सम्मान,
उस बंधुत्व के लिए ही झुकता है वो नीला आसमान ।।

: तुषार "बिहारी" 

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