माँ's image
खुद रातों को जगकर 
जो मुझको सुलाती है। 
खुद भूखा रहकर
पेटभर मुझे खिलाती है।
त्याग,तपस्या और समर्पण
जिसके हिस्से आता है। 
जिसके ऋण से कोई न
कभी मुक्त हो पाता है।
जिसके आँचल में सारी 
दुनियाँ सिमटी है।
जिसके चरणों मे 
चारो धाम की नगरी है।
जिसके स्नेह मात्र से 
सारे कष्ट दूर हो जाते है।
जिसके ममता से सारे 
काम सिद्ध हो जाते है। 
जिसका आशिष सदा
तुम्हारे साथ चलता है। 
जिसकी साया में 
नन्हा बालक पलता है।
जो चेहरे देख देखकर
हर मुश्किल का हल बताती है। 
रातों को लोरी सुनाकर 
मुझे सुलाती है। 
जिसके हाथों की दाल रोटी
भी अमृत जैसे लगते है।
जो गीता का ज्ञान 
अपने अनुभव से बतलाती है। 
जो रोते चेहरे पर भी 
ख़ुशहाली लाती है।
जिसने खुशियां त्याग दिया 
हम सबकी खुशहाली में।
जिसको दुनियाँ भी ममता 
का सागर बतलाती है। 
जिसके आगे देवलोक भी 
सीस झुकती है।
वो ही तो परमपूजनीय 
माँ कहलाती है ।

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