ये रात भी चलती है's image
Poetry1 min read

ये रात भी चलती है

Bharti TripathiBharti Tripathi October 10, 2021
Share0 Bookmarks 122 Reads1 Likes

"ये रात भी चलती है"


ये रात भी चलती है

पहरों पहर

ये काली सी..स्याही में डूबी सी

कभी नीली सी ये रात।


कभी चांदनी को खुद में समेटे हुए

कभी चाँदी की ओढ़नी ओढ़े हुए

लहराती मचलती ये रात।

बहती हवा से करती

हंसी ठिठोली

बन जाती दोनों ये पक्की सहेली

एक दूजे से मन का हाल सुनाती

गाती गुनगुनाती ये रात।


झिलमिल सी जगमग सी

चमकीले सफ़ेद मोतियों से सजी

झीनी सी चादर लपेटे हुए

मन मोह लेती ये रात।


कभी कवि की कलम की

बन जाती हमसफ़र

कभी बन जाती है

राही की रहगुज़र

कभी नन्हें से बालक को

बहलाती सुलाती

लोरी सुनाती ये रात।


बस ऐसे ही चलती ये रात

ये रात भी चलती है

पहरों पहर।

- भारती त्रिपाठी

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts