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मैं हूँ आज की नारी

Bharti TripathiBharti Tripathi November 28, 2021
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"मैं हूँ आज की नारी"


दबती न,आवाज़ उठाती

मुझमें न निर्बलता,

सभी निभाती ज़िम्मेदारी

मैं हूँ आज की नारी!


सूझ-बूझ से घर को चलाती

सूझ-बूझ से दुनिया,

खुलकर अपनी राय बताती

मैं हूँ आज की नारी


मैं माँ हूँ, मैं गुरु,मैं पत्नी

मैं ही हूँ अन्नपूर्णा,

रक्षक बनकर देश बचाती

मैं हूँ आज की नारी!


नहीं हटूँगी,डटी रहूँगी

अत्याचार को नहीं सहूँगी,

कठिनाई से मैं ना हारी

मैं हूँ आज की नारी!


नहीं चाहिए कम का दर्जा

नहीं चाहिए ज़्यादा

बराबरी की बात है सारी

मैं हूँ आज की नारी।

             -भारती


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