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कल्पनाओं की उड़ान

Bharti TripathiBharti Tripathi November 21, 2021
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"कल्पनाओं की उड़ान"


जीवन के विशाल आकाश में

वो भरती रहती है,

कल्पनाओं की उड़ान।

हवा के वेग से भी 

कहीं ज़्यादा तेज़।

वो उड़ती जाती है।

वो इच्छाओं की पोटलियाँ

एक-एक कर खोलती जाती है,

और दुनिया भर की खुशियाँ

अंतस में अपने समेटती जाती है।

वो भावनाओं की डोर के सारे छोर

आपस में जोड़ती जाती है,

वो ऐसे ही बार-बार जीती जाती है।

वो खुलकर साँसें भरती जाती है,

वो निरंतर हवा-सी बहती जाती है।

पलकों के भीतर आँखें मींचे

अनगिनत सपने वो बुनती जाती है।

प्यारे-प्यारे उन सारे सपनों को 

जी भरकर जीती जाती है।

वो खोती जाती है,

अनंत आकाश में।

वो ऐसे ही बार-बार जीती जाती है।

वो भरती रहती है,

कल्पनाओं की उड़ान!


                  -भारती



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