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"गुज़ारिश"


ये जो तुमने बरसों से

इतने आँसू अपने दिल में 

छिपाए रखे हैं,

जिन्हें बहाने से तुम

हमेशा से डरते थे,

और डरते हो

कोई नहीं देखेगा

वो सब अब बहा दो

क्योंकि तुम भी तो

इंसान हो।

जमने न देना इन्हें

नहीं तो सुकून जम जाएगा।

सुकून बहते रहना चाहिए।

क्योंकि भावनाओं का समंदर

जितना मुझमें है

उतना ही तुममें भी तो है।

यही एक गुज़ारिश है।


            - भारती



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