सम्भव's image
Share0 Bookmarks 68 Reads0 Likes


जीवन में सम्भव नहीं 

हर एक बार जीत जाना 

अनुभव वो भी प्रबल है

टूटना और बिखर जाना


नियति है उल्हास किसी को 

नियति है अन्याय भी

जैसे पत्थर पूज्य है

और है पत्थर रेत भी 


बरसों लगे रेतों को 

हिमालय बन जाने में 

और समंदर सूखे कई बार 

डूबने और उबर जाने में 


सोचो परखो संकल्प करो

रुको ना जीत में ना हार में 

राह हो दुर्लभ या जटिल हो

सम्भव है सब संसार में।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts