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इक रात है झेलम

त्राणत्राण November 25, 2021
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पशेमाँ इक रात है झेलम सी

दिल में कई बात है पैहम सी 


लब पे आते नहीं बेचैनियाँ जिगर के 

रूह पे कौन लगता है मरहम जी


सैयारों का कहाँ होता है अपना सूरज 

नाचीज़ है गर्दिशी तारों का पुर-नम जी 


तुम्हें मुझसे रंज भी है ग़म भी

देख घुटनों पे बैठा है आज़म भी 


ताउम्र का तिलस्म है येत्राण

इश्क़ वहम भी है सितम भी 

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