अनकही बातें's image
Share0 Bookmarks 22 Reads0 Likes

मैं कुछ कहना चाहता हूँ यही मेरी व्यथा रही

अक्सर सोचता हूँ कुछ नहीं कहना हो तो कितना अच्छा हो

शांत एकदम 

कुछ तो राहत मिले इस जद्दोजहद से

ख़्याल नहीं आए एक भी 


सोचते- सोचते माथे का बल सीने पे उग आता है

और मैं बो देता हूँ 

वो सारी बातें सीने में 

जो लहलहा उठती है ज़हन में 

काश कि मुझे बोने की जगह दफ़न करने आता 

तो ऐसी कितनी अनकही बातें 

दफ़न रहती 

हिचकी में वो ही अनकही बातें अक्सर ज़ुबान पे आना चाहती हैं।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts