गुनाहों के पन्नो's image
Love PoetryPoetry1 min read

गुनाहों के पन्नो

thekaivthekaiv November 26, 2021
Share0 Bookmarks 136 Reads1 Likes

आंखों से सरकते,

नींदों के ये सिलसिले।

यादो के झुरमुट में,

अटक से जाते है कहीं।

कहते दरख्तों से शायद,

ये कहानी अपनी।

वो गुनाहों के पन्नो में,

उलझ से जाते है कहीं

#kaiviakLower left fountain pen

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts