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मेरा अंदाज

Surbhi ThakurSurbhi Thakur June 9, 2022
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लिखने का मेरा अंदाज़ नहीं,  तुम्हारे  अंदाज़ के समरूप, 
या तो बदल दूं अपना ढंग,  या महफ़िल को कर दूं अपने अनुरूप, 
शामें रंगीन हों जाये,   मेरी हर  कविता की पंक्ति से, 
कर दे सुबह भी जल्दी,  चमक कर  सूरज की किरन से,
प्रतिस्पर्धा नहीं,  ये शौक हैं , सबसे हट के लिखने का, 
कवियों की महफ़िल में ,  अलग वज़ूद से दिखने का, 
संदेह जो मुझको होता कभी,  खुद के लेखन को लेकर,
रिश्ता शब्द और दिल का बयां करती , तर्क अपने पक्ष में देकर, 
यूं तो कविताओं का  खङा अंबार तुम्हारे सामने, 
सुनते हों  तुम,  रख कर दिमाग में कई पैमाने, 
तुम्हारें हर पैमाने पर,  हर कविता खरी उतरती नहीं, 
क्योंकि  धड़कन  मेरी हैं वो,  तुम्हारे हिसाब से चलती नहीं, 
दे सकते हों तुम भी,  अपने पक्ष में तर्क हज़ार, 
फिर भी रहेगा मुझे,  खुद के अंदाज़ से प्यार, 
गुरूर नहीं,  गर्व हैं  मेरी कविता, मेरे अल्फाज़, 
हिम्मत करो  थोड़ी, और ढूंढो मेरी गहराइयों के राज़ , 
मैं ये नहीं कहती कि  तुम्हारा अंदाज़ है गलत, 
हर कवि का अपनी रचना पर है पूरा पूरा हक़, 
बस अपने तराजू से मेरी कविता ना तोलना,  
अपने नज़रिए को मेरी कविता में ना खोजना, 
मेरी कविता में तुम्हें दिखेगी मेरी परछाई ही, 
गूँज होगी जिसकी तेज , जैसे हों एक शहनाई ही 

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