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यादों का कारवां

Thakur Yogendra SinghThakur Yogendra Singh January 8, 2022
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घर से तो खाली हाथ ही,निकला था सफर पर।

यादों  का,  साथ साथ मेरे  कारवां  चला।।

...

जो छूट गया, उसका कोई गम करे भी क्यों ।

अपना जो नहीं, उससे क्या उम्मीद भी भला।।

...

पाने की खुशी, खोने का अफ़सोस नहीं कुछ।

सपनों में भी अपनो से, कोई क्यों करे गिला।।

...

किस्मत के सभी खेल, नहीं कुछ भी अपने हाथ।

जो जिसके था नसीब में, उसको वही मिला।।

...

जो आप कहें वो सही, जो मैं कहूं गलत।

जो साथ मिला वो भी, इसी राय से मिला।।

...

कभी खुद की वजह से,नहीं हो तकलीफ किसी को।

सोचा  यही  सदा, न  मिला  पर  कोई  सिला।।

...

अब उसके भरोसे ही, छोड़ दी है ज़िन्दगी।

जिसने पकड़ के हाथ, दिया आज से मिला।।

...

अच्छाई से अच्छा, न कुछ बुराई से बुरा।

चलता रहा है, चलता रहेगा ये सिलसिला।।








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