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अम्बर सी ये नीली आंखें,

शबनम सी शर्मीली आंखें।

किसकी यादों में खोइं हैं,

किस गम से हैं गीली आंखें।।


खोज रहा हूं इन आंखों में,

में अपनी आंखों का सपना।

इन झीलों की गहराई में,

खोया है मेरा कुछ अपना।।


सपने गर अपने हो पाते,

सपने में ही हम खो जाते।

बहकी बहकी तेरी सांसों,

की सरगम के तार झुलाते।।


खोज रहा हूं इन सांसों में,

कोई सांस मेरी मिल जाए।

मेरे अंतर की तड़पन जो,

तेरी सांसों तक पहुंचाए।।


बोलो तो कुछ बात बने,

मत यूं इतने चुपचाप रहो तुम।

अपनों से अपनेपन से, जो

दिल में है वो बात कहो तुम।।


खोज रहा हूं इन होंठों पर,

अपने जीवन की अभिलाषा।

एक शब्द में कैद पड़ी हैं,

मेरी खुशियां, मेरी आशा।।


इस आशा को तोड न देना,

खुशियों का मुख मोड़ न देना।

दिल टूटा तो बुझ जाएंगी,

मेरी ये गर्वीली आंखें।।


अम्बर सी ये नीली आंखें,

शबनम सी शर्मीली आंखें।

किसकी यादों में खोई हैं,

किस गम से हैं गीली आंखें।।

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