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सपने

कभी सच नहीं होते।

और जो सच हो जाते हैं,

वो सपने नहीं होते।।

सपने

सदा अपनो के ही आते हैं।

और वही अपने, अचानक

सपनों में ही कहीं खो जाते हैं।।

सपने

भूली बिसरी यादों से जुड़े होते हैं।

यादें जब उभरतीं हैं,

तो फिर हम कहां सोते हैं।।

सपने

कहा जाता है कि हमें,

भविष्य का बोध कराते हैं।

पर 'भूत' के सताए हम,

वर्तमान से ही कहां निकल पाते हैं।।

सपने

अपनी ही सोच का आईना होते हैं।

यूं ही खयालों में डूबते उतराते हम,

सोते-जागते नित नये

लुभावने और डरावने सपनों में खोते हैं।।




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