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रिश्तों की जंजीर

Thakur Yogendra SinghThakur Yogendra Singh January 2, 2023
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विनम्रता की भी सीमा है, अति - संयम नादानी है।

आत्मसम्मान दांव पर हो तो, हर रिश्ता बेमानी है।।


नजरंदाज करे जब कोई, उसको नजरंदाज करो।

बार बार जो करे उपेक्षा, खुद से दूर दराज करो।।


स्वाभिमान बस किसी एक की व्यक्तिगत जागीर नहीं है।

बात आत्मगौरव की हो तो, फिर कोई जंजीर नहीं है।।


आदर, स्नेह, प्यार में खुद का तिरस्कार मत सहो कभी।

बार बार की अवहेलना को, मजबूरी मत कहो कभी।।


समझाने से भी ना समझे, खामोशी हथियार बने।

खामोशी से ही उत्तर दो, चाहे जितनी रार ठने।।


भार बने जो रिश्ता, उसका भार हटा दो जीवन से।

नहीं करे स्वीकार, उसे भी अस्वीकार करो मन से।।


जिसे नहीं सम्मान, दूसरे का खुद जैसा प्यारा है।

अपनी जिद,बेरुखे रवैए से, जिसने सदा नकारा है।।


उसको भी एक बार, दिलाना यह अहसास जरूरी है।

रिश्ता, फर्ज स्वयं संचित है, नहीं कोई मजबूरी है।।


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