ख़ामोशी's image
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खामोशी है खतरनाक हथियार,न इसका वार करो।

लड़ो, झगड़ लो, नाराजी या गुस्से का इजहार करो।।


खामोशी से एक अघोषित, युद्ध सदृश छिड़ जाता है।

जब अनचाही रोषयुक्त, वाणी से मन चिढ़ जाता है।।


दोष, रोष, आक्षेप अनर्गल, अवगुण गाए जाते हैं।

अनुपयुक्त, अनचाहे जब, आरोप लगाए जाते हैं।।


नहीं समझ पाता कोई, तब दर्द हृदय के घावों का।

आहत होते रिश्तों का,घायल आन्तरिक लगावों का।।


वाणी पर हो व्यथा असीमित, ना सुनना चाहे कोई।

किए धरे को लानत देकर, उल्टा हड़काए कोई।।


तब इंसान समाहित कर सब, खामोशी को ढोता है।

छा जाता अवसाद हदय पर, निर्जन में ही रोता है।।


एकाकीपन सदा अहितकर और कष्टप्रद होता है।

स्वजनों का सहयोग मिले तो, शनै शनै सुख होता है।।


इसीलिए खामोशी को तज, स्थिति को स्वीकार करो।

छोटी छोटी खुशियां ढूंढो, और स्वयं से प्यार करो।।


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