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कामनाओं का अन्तर्विरोध

Thakur Yogendra SinghThakur Yogendra Singh March 14, 2022
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जो न हो उपलब्ध, उसकी लालसा होती है हर क्षण,

जो न हो किस्मत में, उसके ख्याल आते हैं जहन में।

हो न जिसकी कामना,वो मिल भी जाए तो सहज है,

और जिसकी कामना हो, ना मिले, पीड़ा गहन में।।

...

मन की वाचलता का न अनुमान, न पैमाना है कोई,

समय के संदर्भ में, नित स्वप्न नया रूप  लेते।

मन के आंचल मे विचरती, कामनाओं के सुफल हित,

हम कई अंतर्विरोधों, को बड़े बेमन से खेते।।

...

दृढ़ हो मन, मस्तिष्क सक्षम, तो लगामें खींचता है,

राह अनुचित को न मिलती,बस उचित ही साथ चलते।

डोरियों  में  उन  लगामों  की, इरादे  झूलते  हैं,

हो अवांछित याकि मनवांछित, सभी हमको हैं छलते।।


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