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दोस्ती के नाम...

Thakur Yogendra SinghThakur Yogendra Singh June 21, 2022
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दो हस्ती के मिलन से, पड़ा दोस्ती नाम।

सच्ची हो गर दोस्ती, बनते बिगड़े काम।।

...

एक दूसरे के लिए, रहें सदा तैयार।

ना ही कुछ एहसान हो, ना कोई उपकार।।

...

निर्मल मन, निस्वार्थ ही, रहे जहां व्यवहार।

कैसी भी विपदा पड़े, पड़ती नहीं दरार।।

...

पर मिलता ही कहां है, अब ऐसा संयोग।

अपने ही हित कार्य में, व्यस्त सभी हैं लोग।

...

ऐसी भी क्या दोस्ती, जिसका ओर न छोर।

काज परे कछु और है, काज सरे कछु और।।

...

बिन बतलाए जान ले, दुःख, तकलीफ समान।

तुरत करे उपचार तो, उसे दोस्ती मान।।

...

रही नाम की दोस्ती, बचा नाम का प्यार।

दिनचर्या से लुप्त हैं, परहित, सद्व्यवहार।।

...

अपनी अपनी ढफलियां,अपने अपने राग।

जले होलिका में सभी, दया,धर्म,अनुराग।।




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