बोनसाई's image
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जमीं पर बीज जो पड़ता वो उगता,फूलता,फलता,

तना, शाखाएं बढ़कर, वृक्ष का आकार लेता है।

उगा जो बीज गमले मे, रहा वो वृद्धि से वंचित,

बनावट में वो केवल, वृक्ष का आभास देता है।।

...

सिखाया जो किताबों ने, पढ़ा जो पाठशाला मे,

नहीं वो जिन्दगी की, हकीकत से मेल खाता है।

नियम,आदर्श,आदर,प्यार,शिष्टाचार तक सीमित,

रहा जो,जिन्दगी के द्वन्द में वो पिछड़ जाता है।।

...

अगर कोई न चाहे,हमसे मिलना,बात भी करना,

तो उससे दूर हो जाने में ही, अपनी भलाई है।

न हो दोनो तरफ से जब तलक महसूस जरूरत,

भरोसे के बिना कोई भी रिश्ता "बोनसाई" है।।

...

बनाते हैं नये रिश्ते, सभी अपनी जरूरत से,

जुड़ें जो भावनाओं से, वही अपवाद होते हैं।

अगर सींचो भरोसे और चाहत से इन्हें प्रतिदिन,

तभी बचते हैं, वरना सूखते, बर्बाद होते हैं।।


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