अबूझ अहसास's image
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अन्तर में आत्म का अबूझ अहसास और,

बाहर  बहार, बरसात  बरजोर  है।

श्वास में सुगन्ध का, सरस संयोग शुभ,

चितवन मे चाहत की चाह चहुं ओर है।।

...

कैसे कटेगी, ये कलुषित कालरात्रि,

मेघ महामारी के, मति मोहग्रस्त है।

जान है जहान जहां,जीवन में जोश नहीं,

तहां तारतम्य कहां, तन-मन त्रस्त है।।

...

पावन पुनीत पंथ, प्यार, परिवार से ही,

गांव के गुणों की गाथा पे गया न गौर है।

छप्पर की छांव में छुपेंगे, तो छुएगी नहीं,

घर्षण से घातक, ये घटा घनघोर है।।

...

रास्ते में रोक, रोज राहत रहम की है।

लालसा की लोक के ललाट पे लकीर है।

हाथ में न हाथ, हथियार हार-जीत के हैं,

फल-फूल फेंक,"फंक"फांकता फकीर है।।






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