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गुमनाम मुझे ये कौन से निसान मिटाने है,
न जाने मुझे एसे कौन से ख़्वाब सजाने हैं, ,

अगर मुहब्बत में आखिर यही होना था,
तो अलमारी में रखे वो खत अब जलाने हैं,,

मेरे साथ जो हुआ सो हुआ अब जाने दो,
मुझे तो उस से उस जैसे शक्स मिलवाने हैं,,

मुझे सब लोग आकर मुहब्बत समझाते हैं,
मुझे थोड़ी कोई पंछी यहां आजाद कराने हैं,,

               ✍️टीना कुमावत ✍️

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