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अपने मान की अब रक्षा, नारी तुझको ही है करना..
तुझको इल्म तक ना होगा, किस कर्म का फल है तूने भोगा..

जिसको समझा तू ने बाप, कब करेगा वो ये पाप..
तुझको इल्म तक ना होगा..

माना जिसको तूने भाई, कब बनेगा वो कसाई..
तुझको इल्म तक ना होगा..

कहती है जिसको दोस्त, कब करेगा तुझको रोस्ट..
तुझको इल्म तक ना होगा..

धर्म का मुखौटा ओढ़े सब पाते यहां सम्मान हैं,ना हो नारी का अस्तित्व जहां ऐसे समाज पे धिक्कार है..

अपने मान की अब रक्षा करना तेरा ही अधिकार है..तू बन निडर तू आगे बढ़ तेरा ईश्वर तेरे साथ है..

है तू ही दुर्गा, चंडी तू ही, रण में उतर महाकाली बन करती दानवों का संहार है..अपने मान की अब रक्षा करना तेरा ही अधिकार है...

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