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शब्द श्रृंगार

Tanu Priya ChaudharyTanu Priya Chaudhary November 12, 2021
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मेरे शब्द मेरा सोलह श्रृंगार हैं

जब कण्ठ में विराजे तो नवरत्न हार हैं

जब होठों से छलके तब मेरा प्यार हैं

जब भावेँ सिमटे ये माथे पर

बिन्दी बन मेरा खुमार हैं

आँखों से जब बहते तो

मेरी काजल और लज्जा का आधार हैं

मेरे शब्द जब किसी के कानो पे देते दस्तक

तब कनक कुण्डल का उपहार हैं

ये मेरी हथेलीयों पे मेहन्दी की महक

पैरों पे पायल की झन्कार हैं

ये मेरे शब्द मेरा सोलह श्रृंगार हैं

जब कलाईयों पर बिछती तो अनमोल कंगन हैं

फिर उंगलियों से अंगूठी बन लिपट उनका इकरार हैं

जब कागज पर उतरती तो मेरी भावना का इजहार हैं

ये पैरों पे पयजनिया, नाक पे नथ, हाथों पे चुरी, ललाट पर टिका और माथे पर चुनरी रूप है मेरा प्यार हैं

और क्या कहु इनका

यही मेरा सोन्दर्य यही संपूर्ण श्रृंगार हैं |



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