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मेरी विचारधारा।

itajsiddiquiitajsiddiqui February 19, 2022
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अकसर विचारधारा पे सवाल उठते हैं।
दक्षिणपंथी हो या वामपंथी हो?
साम्यवादी हो या समाजवादी हो ?
मुस्लिम हो या फिर काफिर हो ?

बहुसंखी बोली क्यों बोलूं ?
एक रंग की चोली क्यों ओढुं ?
मेरे विचार तो बहती धारा हैं।
एक विचारधारा से क्यों जोडूं ?

मैं राम भी हूं, ज़रा रावण भी।
मैं पांडव हूं, ज़रा कौरव भी।
मैं गौतम हूं, महावीर भी हूं।
अशोक हूं मैं, सिकंदर भी।
मैं अकबर हूं, शिवाजी हूं।
टीपू हूं मैं, महाराणा भी।
शुभाष हूं मैं, अम्बेडकर हूं।
मार्क्स हूं मैं और लिंकन भी।
मुहम्मद की उम्मत से हूं।
आदम-हौआ का बेटा हूं।
पर पिता मेरा गांधी भी है।
भारत मेरी भी माता  है।
सबके विचार हैं मेरे सीने में।
सब मेरे भीतर जीवित हैं।

फिर भी पूछोगे कौन हूं मैं ?
भारत को बिखरता देख रहा,
एक बेचैन सा भारतवासी हूं।

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