सच's image
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रेत से फैले थे हम
आईना बना दिय था किसीने
साफ से दिखते थे, पर
तोड़ा भी तो था उन्होने ।

राह ढूडने वाला मै
मोतियो सा बिखरा हूँ
मुझे अपना कहने वाले
उन्हे सपनो मे रख आया हु ।

सुख की जैसे छाया है
वैसे मेरी किस्मत की हे काया
थक चुका हूँ बेच के खुदको
पर स्वाभिमान ना गवाया ।

वक्त चलता ही जायेगा
मंजिल की तो सोचो
रिश्ते बदलते रहेंगे
जरा खुदके बारे मे सोचो ।

ये समंदर हे गेहरा यारो
डूबने का मन न करना,
अर्जुन की भांती दिखते हो
दुर्योधन बन के मत रहना ।

क्योकी

ये जालिम हे दुनिया
यहा व्यर्थ ना गवाना खुदको,
घाव तो अपनो के चुभते हे
दुर ही रखना सबको ।

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