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फ़र्ज की असली परिभाषा

Sweety मित्तलSweety मित्तल September 15, 2022
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फर्ज़ की असली परिभाषा मुझे माँ की आँखों में दिखाई देती है,
हर पल जिम्मेदारी उठाकर भी कभी उसकी आह ना सुनाई देती है,
देखती हूँ जब पापा के इन झुके हुए कंधों को तो मुझे वो सारे फर्ज़ याद आ जाते है,
बचपन से लेकर अब तक क्यों पापा सुबह जल्दी घर से निकल जाते है,
जीवन भर फर्ज़ निभाकर वो हमें काबिल बनाते है,
तो फिर क्यों उनके बुढ़ापे में हम उनकी खुशी से आँखें चुराते है,
सोचती हूँ हर फर्ज़ निभाकर भी दोनों कभी नहीं जताते है,
क्या सारे फर्ज़ सिर्फ माता-पिता के हिस्से में ही आते है...

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