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तन्हा दिल

SwatiSwati February 24, 2022
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सोचा न था कभी इतने तन्हा हो जायेंगे
बातें तो खूब करते है, पर दिल की न कह पाएंगे
ऐसा नहीं के एतबार नही उन पे
पर इस हालात का हल वो भी क्या कर पाएंगे ।

मशरूफ है हर कोई यहां अपनी ज़िंदगी संवरने मे
जीतने अपनी तकलीफों से, लड़ने अपनी परेशानियों से
खुद ही जो खुशियां तलाश रहे है,
क्या मेरा गम बांट पाएंगे ?

यूं तो कभी किसी से कहते नही,
एक राजदार के सामने खोल दी थी दिल की किताब कभी
खैर, वो तो थी बीती बातें, भूले फसाने
अब ये दिल के क़िस्से, किसी को नहीं सुनाएंगे।

सिल दिया है होठों को, दिल को लगा दिया है ताला,
चाबी गाड़ दी है बगीचे में,
उसपे लगा दिया है पौधा गुलाबों वाला
देखते है के फूल उसपे, लाल या सफ़ेद आयेंगे ।

_स्वाति शर्मा

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