खामोशी's image
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बड़ी खूबसूरत है यह खामोशी, वो कहते थे,
फिर जाने क्या बात हुई, जाने क्या बदला
न जाने कब यह खामोशी सन्नाटे में बदली

वो कहते थे तुम्हारी आंखे है तुम्हारे दिल की ज़ुबां
फिर सवाल ऐसा किया के नजरें झुक गई मेरी
जवाब में लब तो खुले,पर बस एक आह निकली

इन अश्को से भी उनको शिकायत थी
उदासी भी हमको रास न आई
बड़ी कोशिशों और मशक्कत के बाद
आज मुस्कुराहटों का मुखौटा पहन कर मैं निकली

अजनबी से अजनबी होने तक का सफर तय किया हमने
शुक्रिया मेरे हमसफर के हर मोड़ पे साथ दिया तुमने
अब इजाज़त दो मुझे भी, के कबसे थी इस जिस्म से जान निकली

_स्वाति शर्मा

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