कश्मकश's image
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कुछ कहना है उनसे, कह दूं ?
इस राज़ को क्या आज बे-पर्दा कर दूं ?
जो कह दिया तो अंजाम क्या होगा ?
यां मुस्कुरा के आज फिर बात टाल दूं?

कह दिया तो अरमानों का बांध टूट जायेगा
फिर उन हसरतों को कौन संभाल पाएगा ?
इस नादान दिल को समझाना बड़ा मुश्किल हो जायेगा,
क्यों बेमतलब इतनी परेशानियों को मोल लूं ?

चुप रहना भी कहां आसान है,
हरदम लबों की पहरेदारी भी कौन कर पाएगा ?
सुनते हैं,एक चुप में है सौ सुख
बस इसी बहाने से मन को बहला दूं ?

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