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Peace PoetryPoetry1 min read

*मुझे प्रिय है काला रंग*

Swaranjali SawanSwaranjali Sawan January 3, 2022
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' मुझे प्रिय है काला रंग '

काजल, बिंदी, कपड़े, आँखें, केश और लोग

सबका काला रंग बस इसलिए मेरे अस्तित्व का 

है अभिन्न अंग !

क्योंकि काला रंग समाहित कर लेता है 

स्वयं में प्रकाश को ,

प्रकाश जो दिखाता है रंगों और अस्तित्वों का भेद....

अन्य सभी वर्ण होते हैं सौभाग्य के प्रतीक,

और उनका न होना,

देता है दुर्भाग्य की आशंकाओं को जन्म !

किसी स्त्री के सौंदर्य की परिभाषा में 

बाधक होती है रंगों की विविधता ;

और कभी तो सम्पूर्ण अस्तित्व को बना देती हैं प्रश्न चिह्न !

मुझे अप्रिय लगते हैं वे सभी सामाजिक अनुबंध ;

जिनमें काले रंग के प्रति है अनवरत अस्वीकृति की भावना

जो नहीं समझते इसकी शून्यता का रहस्य !

जिनकी अव्यवहृत आशंकाओं ने 

सिद्ध कर दिया है इसे अशुभ,

और अधिकृत कर दिया अन्य सभी को 

इसके बहिष्कार के लिए !!.....

-स्वरांजलि 'सावन'


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