सूर्यास्त's image
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मुझे ये तो नहीं पता की किसी ढलती चीज़ को मैं क्यों इतना पसंद करती हूं पर हां ये ज़रूर कहूंगी की डूबते सूरज के बिखेरे रंगों के साथ मुझे खेलना पसंद है।
ये वो रंग हैं जो दाग नहीं याद दे जाते हैं।
ढलते हुए भी अंबर को ऐसे सजा देते हैं जैसे किसी कलाकार की सबसे सुंदर रचना हो।
जाते जाते भी सूरज का तेज़ इक वादा करके जाता है कि मैं इसी आसमां में फ़िर लौटके आऊंगा और ये वादा बाकियों के वादों की तरह खोखला नहीं होता। वो वापस ज़रूर आता है।

स्वप्निल

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