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मेरी अभिलाषा

S.VijaylakshmiS.Vijaylakshmi March 3, 2022
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भारत की इस पावनोपुनीत भूमि पर,

सुख शांति अखंड अजय सदा कीर्तिमान हो।

कल्पचित्र जो शत्रु ने खींचे पुण्य धरा पर,

हिम के शिखर शिशिर पर तिरंगा सदैव विराजमान हो।

बल सम्बल अश्रु रक्त से सींचा जो माटी को,

पालनपोषक किसान का प्रज्वल मन बलवान हो।

युवा पीढ़ी त्यागे स्वार्थ लोभ छल बैर को,

जन जन में हम भारत वासी हैं गुमान हो।

हें ईश्वर हे विधाता इतनी सी अभिलाषा मेरी।

हर युवती झाँसी रानी युवक श्री राम सा स्वाभिमान हो।

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