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·      नई नई किरदारों की वहीं पुरानी कहानी हूं मैं।

 कभी रांझा तो कभी मजनू के आंखों का पानी हूं मैं।


 विरह के ज्वाल में चमकती संगमरमर ए ताज जो,

 प्रेयसी के याद में बनी वो अमिट निशानी हूं मैं।


 देश की आन बान शान बचाए रखे हुए,

 हर वो वीर शहीद सैनिक स्वाभिमानी हूं मैं।


 कई ख्वाहिश आरज़ू को कागज़ पे उतार कर बनी हुई,

 किसी की कविता तो किसी की दिले रवानी हूं मैं।

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