#Afghanistan's image
Share0 Bookmarks 38 Reads1 Likes

#Afghanistan

ज़ुल्म जब भी गहराएगा ,

तो रास्ते का काँटा एक नारी होगी।

शस्त्र उठाएगी ,फ़ौज बनाएगी;

सब लड़ाकों पर वो भारी होगी।


हुक्मरान जब भाग खड़े होंगे,

एक उसी के पाँव अड़े होंगे।

वतन बचाने की उसकी तैयारी होगी,

वो कभी 'सलीमा' ,कभी 'गफारी' होगी।

रास्ते का काँटा एक नारी होगी।


सुरुचि 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts