साहस और मैं's image
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सीधी सादी सौम्य सुलहरें

कभी सुनामी लहर समंदर

पलट कभी फिर यह न कहना

साहस नहीं है ,मेरे अंदर


कभी सुनहरी धूप सुलभ सी

कभी जला भी सकता दिनकर

पलट कभी फिर यह न कहना

साहस नहीं है, मेरे अंदर


कभी फुहारें ,रिमझिम रिमझिम

कभी गरज कर बरसे अंबर

पलट कभी फिर यह न कहना

साहस नहीं है, मेरे अंदर


कभी हवाएं नाजुक ,कोमल

कभी जो बिगड़ें, बने बवंडर

पलट कभी फिर यह न कहना

साहस नहीं है, मेरे अंदर।

✍️ Dr Babar Khan Suri

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