सोच से बाहर's image
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जब सोच के बाहर सोचा तो

पाया खुद को

कल्पना से परे ,

संभावनाओ से पूर्ण,

उत्साह से लबरेज

और एक अंतहीन जीवन।


जब सोच के बाहर सोचा तो...

पाया,

एक स्वछंद अंतर

एक निः स्वार्थ मित्र

एक परमार्थ चरित्र

और एक अनंत जीवन।


जब सोच के बाहर सोचा तो...

पाया,

यह सोच है सीमा से परे

यह सोच है क्षितिज निर्विघ्न उड़ान

यह सोच ही है जो रचवाएं ,

अपने जीवन के किरदार ।


तो सोच के बाहर सोचो ही,

जीवन ना बदले,

तो बदले किरदार

सोच के बाहर सोचो ही

और भरों....

पिंजर -मुक्त- पुलकित पंख उड़ान।।


-Shruti alankaar...

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