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दर्द दूरियों के करते हैं रतजगे

सन्नाटा है हम दोनो के दरमियाँ!


काट रहे लहरों को चप्पू नाव के

रंग चमकते हैं पानी के घाव के


राह रोकती हरी हरी जलकुम्भियाँ!


ऑखों से गिरते थे झरने प्यार के

रहते थे हम नीचे हरसिंगार के


अद्भुत थीं वो चुप्पियाँ तनहाइयाँ!


Dr.Sunil Kumar Meena

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